एसएडीओ का कहना है, नहीं मिली प्रतिबंधित कीटनाशकों की सूची। प्रभारी डीडीए शशांक शिंदे का कहना एसएडीओ को हाथों हाथ दी गयी थी सूची। कौन झूठा कौन सच्चा? देखिये खास खबर …

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एसएडीओ का कहना है, नहीं मिली प्रतिबंधित कीटनाशकों की सूची। प्रभारी डीडीए शशांक शिंदे का कहना एसएडीओ को हाथों हाथ दी गयी थी सूची। कौन झूठा कौन सच्चा? 

रिपोर्टर- गोविंद सिंगरौल

तखतपुर क्षेत्र में बाजारों में प्रतिबंधित कीटनाशक नही बिक रहे हैं इसकी कोई गारंटी नही है।इसका कारण तख़तपुर के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को बैन पेस्टिसाइड की जानकारी नही होना है।वही उनके उच्चाधिकारी का कहना है कि लिस्ट उनके हाथों में दिया गया था।अब उच्चाधिकारियों द्वारा हाथों में दी गयी जानकारी को ही झुठलाने वाले अधिकारियों की कार्यशैली और बाजारों में कृषि केंद्रों में नियंत्रण का अंदाजा लगाया जा सकता है।

तख़तपुर के बाज़ार में यदि किसी कृषि केंद्र से कोई कीटनाशक खरीद रहे हो तो सावधान हो जाइए।हो सकता है कि वह वह प्रतिबंधित कीटनाशक हो।क्योंकि बाज़ार में प्रतिबंधित कीटनाशकों के विक्रय पर नियंत्रण करने वालो को ही इसकी जानकारी नही नही है।जब तख़तपुर के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी से प्रतिबंधित कीटनाशकों की जानकारी मांगी गई, तोउनका कहना था कि शासन के द्वारा उनके कार्यालय में सूची ही नही भेजी गई है।अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कृषि विभाग के अधिकारी किस तरह अपना काम कर रहे होंगे और कैसे बाज़ार में प्रतिबंधित कीटनाशकों की जांच हो रही होगी।जब एल पी कौशिक से प्रतिबंधित कीट नाशकों की सूची मांगी गई तो उन्होंने फाइलों में खोजने का दिखावा किया फिर कहा कि हमारे यहां इसकी सूची नही भेजी गई है।लेकिन अपने अनुभव और याद के आधार पर कुछ नाम बता सकता हूँ ।जब उनसे पूछा गया कि आपके अधिकारी कृषि केंद्रों में जांच किस आधार पर करते है।तो उनका कहना था कि जब किसान शिकायत करते हैं तो जांच की जाती है।किसान शिकायत नही कर रहे इसका मतलब की बाजार में प्रतिबंधित कीट नाशक नही बिक रहे हैं ।यदि बैन कीटनाशक किसानों को बेचे जाते तो वे शिकायत लेकर आते ।जबकि जिला स्तर के अधिकारी का कहना है कि शासन से हर कार्यालय को प्रतिबन्धित कीटनाशकों की सूची भेजी गयी ,और यह सूची स्वयं वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारियों के हाथों में दिया गया था।

क्या है प्रतिबंधित कीटनाशक?

शासन समय समय पर हानिकारक कीटनाशकों के विक्रय और उपयोग पर प्रतिबंध लगाता रहता है।जिन कीटनाशकों और दवाओं पंर प्रतिबंध लगा होता है,उसके बाजार में बिक्री को रोकने का काम ब्लॉक स्तर पर एसएडीओ का होता है।इन पेस्टिसाइड्स के उपयोग से फसलों के उत्पादों को उपयोग करने वाले के स्वास्थ्य नुकसान के साथ , जमीन और पानी जहरीला हो जाता है,फसलों को लाभ पहुंचाने वाले जीव भी मर जाते हैं ।इससे जमीन की उर्वरा शक्ति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।इसे रोकने के लिए शासन ऐसे कीटनाशकों के विक्रय पर रोक लगाते हुए उसे बैन कर देता है।कुछ कीटनाशक ऐसे होते है जिनके उपयोग के लिए कुछ परिस्थितयां और शर्तें भी होती है,जिनका पालन ऐसे कीटनाशकों के उपयोग करते समय किया जाता है।प्रतिबंधित कीटनाशकों की सूची हर विकासखंड स्तर के अधिकारी तक पहुचाई जाती है।लेकिन तख़तपुर के एसएडीओ का कहना है कि उन्हें यह सूची आज तक नही मिली है।

अभी तक शिकायत नही आई है

एसएडीओ एल पी कौशिक का कहना है कि अभी तक उनके पास किसी किसान की शिकायत नही आई है।इसका मतलब यह है कि उनके द्वारा उपयोग किया जा रहा कीटनाशक बैन कीटनाशक नही है।जब उनसे पूछा गया कि आप लोग किसके आधार पर जांच करने जाते है। तो उनका कहना था कि किसान शिकायत करें तो जांच करने जाएं।तात्पर्य यह कि किसान अपना ही पैसा खर्च करके अपनी फसल बर्बाद होता देख शिकायत करने कृषि विस्तार अधिकारी के आफिस आएं तो साहब जांच करने जाएंगे।उसके पहले यह सुनिश्चित नही करेंगे कि बाजार में बैन पेस्टिसाइड बिके ही नही।इससे ऐसा लगता है कि कृषि विस्तार अधिकारी एल पी कौशिक को अपनी ड्यूटी निभाने के लिए किसानों के फसल के बर्बाद होनें और शिकायत करने का इंतजार है।

यह है इनकी जवाबदारी

विकासखंड स्तर पर वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी की नियुक्ति उस क्षेत्र में कृषि केंद्रों और खाद दुकानों पर शासन की ओर से नियंत्रण करने के लिए किया जाता है।उनका काम होता है कि इन दुकानों पर प्रतिबंधित दवा और खादों ,नकली बीजो, एक्सपायर्ड दवाओं का विक्रय न हो।यदि ऐसा करते पाया जाता है तो।उसे दुकान को सील करने ,लाइसेंस को रद्द करने और जुर्माना लगाने का भी अधिकार होता है।लेकिन अधिकारी इन दुकानदारों से सेटिंग कर लेते हैं और जांच करनेकी खाना पूर्ति भी नहीं करते ।इसके कारण किसानों की फसलों को नुकसान होने के साथ आर्थिक नुकसान भी होता है।

वही प्रभारी डीडीए (डिप्टी डायरेक्टर कृषि) शशांक शिंदे का कहना है कि हमारे यहां से सभी को प्रतिबंधित कीटनाशकों की सूची और राजपत्र की कॉपी सभी एसएडीओ को हाथों हाथ दिया गया था।उनका यह कहना सही नही है।

यह हैं 27 प्रतिबंधित कीटनाशक

मानव जाति और पशु-पक्षियों व जलीय जीवों पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने विशेषज्ञों से रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने इन 27 कीटनाशकों को बैन किया है जो यह हैं ऐसफेट, अल्ट्राजाईन, बेनफराकारब, बुटाक्लोर, कैप्टन, कारबेडेंजिम, कार्बोफ्यूरान, क्लोरप्यरिफॉस, 2.4-डी, डेल्टामेथ्रीन, डिकोफॉल, डिमेथोट, डाइनोकैप, डियूरॉन, मालाथियॉन, मैनकोजेब, मिथोमिल, मोनोक्रोटोफॉस, ऑक्सीफ्लोरीन, पेंडिमेथलिन, क्यूनलफॉस, सलफोसूलफूरोन, थीओडीकर्ब, थायोफनेट मिथाइल, थीरम, जीनेब व जीरम।

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